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Pujivadi Samaj - (Marxvad Parichaymala - 2)

Shib Verma · 2012

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About the book

शोषण पूंजीवादी समाज की बुनियाद है | गुलामी और सामन्तवाद के युग में शोषण खुले तौर पर होता था। पूंजीवादी समाज में शोषण छिपे तौर पर होता है, हालांकि मजदूर अपने तजुर्बे से रोज देखता है कि पूंजीपति उसकी मेहनत के बल पर मौज उड़ा रहा है। पूंजीवाद में शोषण का छिपा स्वरूप इसलिए है क्यों कि यहां मजदूर कानूनी तौर पर आजाद है और मालिक से बंधा नहीं है। कानून उसे किसी के यहां काम करने के लिए मजबूर नहीं करता। लेकिन मजदूर के हाथ से औजार छीन कर उसे ऐसा लाचार बना दिया गया है कि अगर वह मजदूरी न करे तो चार दिन भी जिन्दा न रहे। गुलाम मालिक की सम्पत्ति था। इसलिए उसे खाना देना मालिक की जिम्मेदारी थी। मजदूर के मामले में पूंजीपति इस जिम्मेदारी से बरी है। यहां खेतिहर गुलाम की तरह मजदूर भी कुछ समय अपने लिए काम करता है और बाकी समय मुफ्त पूंजीपति के लिए काम करता है- अब मजदूर के स्वतन्द्र होते हुए भी उससे पूंजीपति मुफ्त में कैसे काम करा लेता है. इसका राज सुनिये इस किताब में।

Book details

Year
2012
Language
English
Publisher
National Book Agency Private Limited
Editions
1
Pages
32
ISBN
9789348253873

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